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Tuesday, February 21, 2017

शांतिपूर्ण रहे नगर निगमों के चुनाव; नज़र अब बीएमसी पर

महाराष्ट्र के बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) सहित दस अन्य नगर निगमों के चुनावों के लिए आज मतदान हुआ। मुंबई के सियासी गलियारे पर किसका राज होगा ये फैसला ईवीएम में बंद हो गया है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला अलग होकर चुनाव लड़ रहीं भाजपा और शिवसेना के बीच है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस चुनाव के लिए अपनी-अपनी पार्टियों का नेतृत्व करते हुये जोर-शोर से चुनाव प्रचार किया। विपक्षी कांग्रेस और राकांपा ने भी अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है।
जिन 10 नगर निगमों में चुनाव हो रहे हैं उनमें मुंबई, ठाणे, उल्हासनगर, नासिक, पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़, सोलापुर, अकोला, अमरावती और नागपुर शामिल हैं। साथ ही रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, पुणे, सोलापुर, नासिक, अमरावती और गढ़चिरौली में भी मतदान हुआ। इन जिलों की 118 पंचायत समितियों में चुनाव हो रहा है। राज्य में 43,160 मतदान केंद्रों पर मतदान सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुआ। चुनाव ड्यूटी पर 2.76 लाख चुनाव कर्मचारी और करीब इतनी ही संख्या में पुलिस कर्मी तैनात किये गये थे।
हालांकि इनमें बीएमसी के चुनाव पर सबकी आंखे टीकी हुई है। शिवसेना और बीजेपी के रिश्तों में आई तनातनी के बीच हो रहे ये चुनाव मुंबई तथा महाराष्ट्र की राजनीति के लिए काफी अहम हैं। 37 हज़ार करोड़ रुपये वाली मुंबई महानगरपालिका को देश की सबसे अमीर महानगरपालिका माना जाता है। जानकारों की माने तो कहने को यह केवल स्थानीय निकाय के चुनाव हैं लेकिन देश की सभी बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों की इज्जत दांव पर लगी है। पिछले कुछ समय से जारी जुबानी जंग के बीच करीब 25 सालों में पहली बार बीजेपी और शिवसेना ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। उद्धव ठाकरे के साथ-साथ सीएम देवेंद्र फडणवीस की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। 
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के लिए करीब पौने तीन करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। यहां 55 प्रतिशत वोटिंग हुई जो एक रिकार्ड है।
यहां 227 सीटों के लिए 2275 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चुनाव के नतीजे  23 फरवरी को आएंगे।
मतदान के दौरान हर वर्ग की अच्छी हिस्सेदारी देखने को मिली। महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी बढ़चढ़ कर मतदान के लिए पहुंचे। चुनाव में तमाम जानी-मानी हस्तियां वोटिंग के लिए पहुंचीं। राजनेताओं की बात करें तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई में वोट डाला।
फिल्म अभिनेत्री रेखा और फिल्म निर्देशिका जोया अख्तर ने बांद्रा इलाके में मतदान किया। पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और संदीप पाटिल भी वोट डालने पहुंचे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में मतदान किया। 
बीएमसी चुनाव के इतिहास पर अगर नजर डालें तो पहले के चुनाव बीजेपी-शिवसेना साथ मिलकर लड़ी थीं। 2012 शिवसेना ने 75 सीटें जीती थीं, जबकि 2007 में शिवसेना के खाते में 84 सीटें गई थीं। वहीं 2012 में बीजेपी के खाते में 31 सीटें आई थीं। 2007 में बीजेपी को 28 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
राज्य चुनाव आयुक्त जे. एस. सहारिया के अनुसार, प्राथमिक तौर पर राज्य में नगर निगमों के चुनावों में औसतन 56.30 प्रतिशत तथा 11 जिल्हा परिषदों एवं 118 पंचायत समितियों के लिए औसतन 69.43 प्रतिशत मतदान हुआ।



Monday, February 20, 2017

कर्मठ विदर्भवादी थे जांबुवंतराव धोटे

 पूर्व लोकसभा सांसद और अलग विदर्भ आंदोलन के कट्टर समर्थक जांबुवंतराव धोटे का हाल ही में यवतमाल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। एक कर्मठ विदर्भवादी के रूप में वे जाने जाते थे। परिवार के मुताबित धोटे की उम्र 83 वर्ष थी और उनके परिवार में पत्नी अैर दो बेटियां हैं।

धोटे की बेटी क्रांति ने पीटीआई को बताया, कि उनके पिता को दिल की बीमारी थी। सुबह करीब तीन बजे उन्हें कुछ बेचैनी महसूस हुई और वो अकेले ही यवतमाल के सरकारी अस्पताल गए। अस्पताल में उन्हें दिल का दौरा पड़ा और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

धोटे की पहचान तेज तर्रार नेता की थी और उन्हें पूर्वी महाराष्ट्र में अलग राज्य की मांग के लिए आक्रामक रूख की वजह से विदर्भ का शेर कहा जाता था। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर गृह जिले यवतमाल से शुरू किया जहां उन्होंने नगर परिषद चुनाव जीता। इसके बाद धोटे ने राज्य-स्तरीय सियासत में पदार्पण किया। 

धोटे पांच बार महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए जबकि 1971 में उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक उम्मीदवार के तौर पर पहला लोकसभा चुनाव जीता। 1980 में धोटे कांग्रेस के टिकट से लोकसभा के लिए चुने गए। धोटे का अंतिम संस्कार यवतमाल के पिंपरी लखीना गांव में किया जाएगा।